सेक्सवर्कर से वर्तमान सेक्स्टोरशन तक
अंतरंगता जब हथियार बन जाए तवायफ की ऐतिहासिक छवि से आधुनिक सेक्सटॉर्शन तक: सहमति, शोषण और ब्लैकमेल पर एक आत्मविश्लेषी ब्लॉग रुद्र प्रताप सिंह एक परिचित व्यक्ति ने मुझसे पूछा, “क्या अब किसी से संबंध बनाना भी जोखिम है? कभी वीडियो बना लिया जाता है, फिर पैसे माँगे जाते हैं। दूसरी ओर देह व्यापार, मजबूरी और यौन शोषण की खबरें हैं। इन सबको समझें कैसे?” उनके प्रश्न में डर था, थोड़ा क्रोध भी। मैं समझ सकता हूँ। जब निजी क्षण को सार्वजनिक करने की धमकी दी जाए तो प्रतिष्ठा, परिवार और नौकरी एक साथ दाँव पर दिखाई देते हैं। लेकिन क्रोध में यदि हम तवायफ, कॉल गर्ल, किसी सम्पन्न महिला, तस्करी की शिकार लड़की और वीडियो से ब्लैकमेल करने वाले अपराधी को एक ही नाम दे दें, तो सच्चाई छिप जाती है। इस विषय पर सोचते हुए मुझे तीन सवाल साथ रखने जरूरी लगते हैं। किसकी स्वतंत्र सहमति थी? किसकी स्वतंत्रता छीनी गई? और किसने किसी की निजता या भय को पैसे का साधन बनाया? इन तीन सवालों के उत्तर अलग हों तो हमारी नैतिक और कानूनी समझ भी अलग होनी चाहिए। यह लेख किसी एक लिंग को निर्दोष और दूसरे को दोषी घोषित करने के लिए नहीं है। पुरुष, म...